AIIMS Tanvi Death: दिल की जन्मजात बीमारी से जूझ रही 16 वर्षीय तन्वी ने 13 साल तक इलाज और सर्जरी का इंतजार किया, लेकिन आखिरकार 1 सितंबर की सुबह उसकी मौत हो गई। अब सवाल है आखिर इतने वर्षों तक सर्जरी क्यों नहीं हो सकी? राजस्थान के कोटा की रहने वाली तन्वी का इलाज दिल्ली स्थित AIIMS में चल रहा था। परिवार के मुताबिक, वह बचपन से ही गंभीर हृदय संबंधी बीमारी से जूझ रही थी। 13 साल का इंतजार परिजन लंबे समय से उसकी सर्जरी की उम्मीद लगाए बैठे थे और इलाज के लिए लगातार AIIMS के चक्कर लगाते रहे। मामला सामने आने के बाद AIIMS प्रशासन ने उच्चस्तरीय कमेटी गठित कर दी है। कमेटी तन्वी के इलाज, मेडिकल रिकॉर्ड और सर्जरी से जुड़े फैसलों की जांच करेगी। 2012 में पहली बार हुई थी जांच AIIMS के मुताबिक, तन्वी को पहली बार 10 अक्टूबर 2012 को कार्डियोलॉजी OPD में दिखाया गया था। जांच में उसे वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट (VSD) और पल्मोनरी एट्रेसिया जैसी जन्मजात हृदय संबंधी समस्याओं का पता चला। इसके बाद 2013 में सर्जरी की संभावना जानने के लिए कई विस्तृत जांच कराई गईं। इनमें CT एंजियोग्राफी, कन्वेंशनल एंजियोग्राफी और कार्डियक कैथीटेराइजेशन जैसी जांच शामिल थीं। इन जांचों के जरिए डॉक्टरों ने तन्वी के दिल की संरचना और बीमारी की जटिलता का आकलन किया। 2017 में क्यों रोक दी गई सर्जरी? AIIMS का कहना है कि विस्तृत मूल्यांकन के बाद 2017 में डॉक्टरों ने माना कि तन्वी की हृदय संरचना और बीमारी की जटिलता को देखते हुए सर्जरी करना संभव नहीं था। परिवार को नियमित मेडिकल जांच और दवाओं के जरिए इलाज जारी रखने की सलाह दी गई। इसके बाद भी तन्वी का AIIMS में फॉलोअप चलता रहा। परिवार ने बाद में सर्जरी की संभावना को लेकर दूसरी राय भी ली। CTVS विभाग के प्रमुख और एक वरिष्ठ कार्डियोथोरेसिक सर्जन से सलाह लेने पर भी दवाओं के जरिए इलाज जारी रखने की सलाह दी गई। हालत बिगड़ी तो ट्रांसप्लांट की जांच अगस्त 2026 में तन्वी की तबीयत बिगड़ने के बाद उसे AIIMS में भर्ती कराया गया। 24 अगस्त को उसकी विस्तृत जांच की गई। इस दौरान उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए हार्ट-लंग ट्रांसप्लांट की संभावना पर भी विचार किया गया। लेकिन इलाज के बीच 1 सितंबर की सुबह तन्वी की मौत हो गई। पिता ने मांगा न्याय तन्वी के पिता मुकेश कुमार ने मामले में कार्रवाई और न्याय की मांग की है। उनका कहना है कि परिवार वर्षों से बेटी के इलाज के लिए प्रयास करता रहा, लेकिन उसकी सर्जरी नहीं हो सकी। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्रालय समेत संबंधित अधिकारियों से शिकायत किए जाने का भी दावा किया। अब जांच कमेटी देगी जवाब AIIMS ने कहा है कि मरीज की सुरक्षा, पारदर्शिता और साक्ष्य आधारित चिकित्सा निर्णय उसकी प्राथमिकता हैं। संस्थान ने कहा कि पोस्टमार्टम और कमेटी की जांच से सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि तन्वी की सर्जरी 2017 में असंभव क्यों मानी गई और क्या उसके बाद इलाज के दौरान कोई वैकल्पिक रास्ता मौजूद था? उच्चस्तरीय जांच के निष्कर्ष से इन सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है। ये भी पढ़ें: चीनी की बढ़ती कीमतों पर सरकार का बड़ा वार! थोक स्टॉक पर 15 सितंबर से लागू होगा नया नियम